समास की परिभाषा और उदाहरण

 समास की परिभाषा - परस्पर संबंध बताने वाले शब्दों का  लोप कर जब दो या दो से अधिक शब्दों का मेल होता है तो उसे समा स कहते हैं 

उदाहरण           

क्रमांक             सामासिक पद               समास विग्रह 
1.              राजभवन                          राजा का भवन

2.             गंगाजल.                          गंगा का जल 

3.             गृहप्रवेश.                          गृह में प्रवेश 


सामासिक शब्द - समास विग्रह में कारक चिन्ह का लोप कर दो या दो से अधिक पद आपस में मिल जाते हैं उसे सामासिक पद या समस्त पद कहते हैं तथा समास भी कहते हैं। 

उदाहरण 1 राजभवन में राजा का भवन समास विग्रह है तथा राजा का भवन का छोटा रूप राज भवन है इसमें कारक चिन्ह का लोप हुआ है उसे सामासिक पद कहते हैं 

समास विग्रह - सामासिक पद या समस्त पद को अलग कर उसकी कारक चिन्हों के साथ जब उसे पहले जैसे रूप में लिखा जाता है उसे समास विग्रह कहते हैं। 

उदाहरण 1,2,3 में क्रमशः राजभवन गंगाजल गृहप्रवेश लिखा गया है इन तीनों शब्दों के आगे क्रमशः राजभवन के आगे राजा का भवन गंगाजल के आगे गंगा का जल गृहप्रवेश के आगे गृह में प्रवेश लिखा गया है तो इसमें राजा का भवन गंगा का जल गृह में प्रवेश यह तीनों समास विग्रह है पूर्व में उदाहरण में दिखाया गया है

समास के शब्द 

समास में मुख्य रूप से 2 शब्द होते है पहला शब्द या पूर्व पद तथा दूसरा शब्द या उत्तर पद कहा जाता है 

 उदाहरण - 3 गृह प्रवेश लिखा हुआ है यहां दो पद है पहला पद गृह तथा दूसरा पद  प्रवेश है और भी कई उदाहरणों में समास में दोनों पद देखने को मिलते हैं कभी-कभी 3 पद भी हो जाता है और यह समास का मुख्य आधार है इन्हीं पदों  के आधार पर हम समास की परिभाषा बनाते हैं इसे समझना अनिवार्य है और यह समाज का महत्वपूर्ण अंग है  

समास के प्रकार 

समास मुख्यतः चार प्रकार की होती है लेकिन इन्हें छः प्रकार भी माना जाता है  

4प्रकार के आधार पर समास   6 प्रकार के आधार पर समास

1. तत्पुरुष समास                  1. तत्पुरुष समास 

कर्मधारय समास.                   2 कर्मधारय समास  

 द्विगु समास                           3 द्वंद समास  

2.बहुव्रीहि समास                    4 द्विगु समास 

3 द्वंद समास                          5 अव्ययीभाव समास 

4 अव्ययीभाव समास।             6 बहुव्रीहि समास    

1 तत्पुरुष समास- जिस समास का पहला पद गौण तथा दूसरा  पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते है 

उदाहरण 

क्रमांक.         सामासिक पद.               समास विग्रह 

1.                 राजपुत्र                       राजा का पुत्र 

2.                पाप मुक्त                    पापा से मुक्त 

इस पद में पुत्र तथा मुक्त प्रधान पद है तथा राज तथा पाप दोनों गौण है दोनों उदाहरणों में दोनों पद में कारक चिन्ह का लोप होकर कमश  राज और पुत्र मिलकर समस्त पद राजपूत्र तथा हापुर मुक्त मिलकर समस्त पद पाप मुक्त हो गए हैं और कारक चिन्ह की विभक्तियां लुप्त हो जाती है प्रथम खंड in जिस विभक्ति का लोप होता है उसी कारक के नाम पर उसका नाम होता है इसलिए कारकों के आधार पर तत्पुरुष समास के छः भेद हैं।       1 कर्म तत्पुरुष 

                 2 करण तत्पुरुष 

                 3 संप्रदान तत्पुरुष 

                 4 अपादान तत्पुरुष 

                 5 संबंध तत्पुरुष 

                 6 अधिकरण तत्पुरुष

1 कर्म तत्पुरुष

              समासिक शब्द               समास  विग्रह 

              सुखप्राप्त                      सुख को प्राप्त 

              आशातीत                     आशा को अतीत 

              चिड़ीमार                      चिड़ियों को मारने वाला 

              कठफोड़वा                   काठ को फोड़ने वाला 

              मुंहतोड़                        मुंह को तोड़ने वाला 

              माखन चोर                   माखन को चुराने वाला 

2 करण तत्पुरुष 

              सामासिक शब्द             समास विग्रह 

              रसभरा                         रस से भरा 

             देहचोर                          देह से चोर 

            रोगपीड़ित                      रोग से पीड़ित 

            श्रमजीवी                       श्रम से जीने वाला

            मदमस्त                         मद से मस्त 

3 संप्रदान तत्पुरुष 

           सामासिक पद                 समास विग्रह 

           गौशाला                         गो के लिए शाला 

           स्नानघर                         स्नान के लिए घर 

           देश भक्ति                       देश के लिए भक्ति 

          सभा भवन                      सभा के लिए भवन 

          राहखर्च                           राह के लिए खर्च 

4 अपादान तत्पुरुष।  

         सामासिक शब्द                 समास विग्रह 

          पत्रहीन                           पत्र से हीन 

          नेत्रहीन                           नेत्र से हीन 

          जन्माध                          जन्म से अंधा 

          धर्म भ्रष्ट                       ‌   धर्म से भ्रष्ट 

5 संबंध तत्पुरुष 

          सामासिक पद                 समास विग्रह 

          हिमालय                         हिम का आलम 

          कठपुतली                      ‌‌‌ काठ की पुतली  

          राजकन्या                        राजा की कन्या 

          देशसेवा                          देश   की सेवा 

          आमफल                        आम का फल 

6 अधिकरण तत्पुरुष 

          सामासिक पद।                 समास विग्रह 

           वनवास।                         वन में वास 

           मुनि श्रेष्ठ।                        मुनियों में श्रेष्ठ 

           दानवीर।                          दान में वीर 

           मनमौजी।                        मन में मोच वाला 

           जलमग्न।                         जल में मग्न  

2.कर्मधारय समास- इस समास का पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य हो उसे कर्मधारय समास कहते हैं 

उदाहरण 

           सामासिक पद                   समास विग्रह 

             प्राणप्रिय                        प्राण के समान प्रिय 

             परमेश्वर                         परम है जो ईश्वर 

            चंद्रमुख                          चंद्रमा के समान मुख 

            नवयुवक                         नव है जो युवक  

इस समास के सभी उदाहरणों को देखने पर पता चलता है कि पहला पद विशेषण है तथा दूसरा पर विशेष्य है जो प्रथम पद दूसरे पद की विशेष्य से को बता रहा है जैसे प्राण प्रिय में प्राण विशेषण शब्द है तथा प्रिय विशेष्य शब्द है प्राण जो है प्रिय की विशेषता को बता रहा है इसी प्रकार सभी उदाहरण में बताया गया है

3 द्वंद समास -जिस समास में प्रथम तथा द्वितीय दोनों पद प्रधान होते हैं उसे द्वंद समास कहते हैं    

उदाहरण 

           सामासिक पद                समास विग्रह 

           रात - दिन                      रात और दिन 

           पाप - पुण्य                    पाप और पुण्य 

           सीता - राम                   सीता और राम 

           फल -फूल                    फल और फूल 

           भाई -बहन                   भाई और बहन 

इस समाज के सभी उदाहरण में हम देख पा रहे हैं की दोनों पद प्रधान है तथा समास विग्रह करने पर सभी उदाहरण में प्रथम पद और द्वितीय पद के बीच में और लगा है 

4. द्विगु समास- जिस समास पहला पद संख्यावाची तथा दूसरा पद संज्ञा हो उसे द्विगु समास कहते हैं। 

उदाहरण 

          सामासिक पद                 समास विग्रह 

          नवग्रह                           नौ ग्रहों का समूह 

         त्रिलोक                           तीन लोगों का समूह 

         षट्कोण                          छह कोणों का समूह 

         सतखंडा                         सात खंडों का समूह 

         चौराहा                           चार रास्तों का समूह 

         पंचमहला                        पांच महलों का समूह  

इस समाज के सभी उदाहरण के पहले पद जैसे नव त्रि सत आदि यह प्रथम पद संख्यावाची है तथा दूसरा पद ग्रह लोक और कोण इत्यादि यह शब्द संज्ञा है  अत दिए गए उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट है

5 अव्ययीभाव समास- जिस समास का पहला पद अव्यय या उपसर्ग होता है तथा दूसरा पद प्राय संज्ञा होता है उसे अव्ययीभाव समास करते हैं 

उदाहरण 

           सामासिक पद               समास विग्रह 

           प्रतिदिन                       प्रत्येक दिन 

           उपनदी                       नदी के समीप 

           यथा स्थान                   यथा स्थान  

इस समास का पहला पद प्रति उप यथा उपसर्ग है तथा दूसरा पद दिन नदी स्थान संज्ञा है अतः अतः परिभाषा के माध्यम से स्पष्ट है के उदाहरण पूरी तरह सरल है

6. बहुव्रीहि समास - जिस समास का पहला तथा दूसरा कोई पद प्रधान नहीं होता एवं समस्त पद किसी अन्य अर्थ प्रकट करता है उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। 

उदाहरण 

        सामासिक पद           समास  विग्रह

        चतुर्भुज                   चार भुजाएं है जसकी        विष्णु 

        त्रिनेत्र                      तीन है नेत्र जिसके            शिव 

        लंबोदर       ‌‌ ‌           लंबा है उदर जिसका          गणेश 

       वीणापाणि           ‌‌    वीणा है पगड़ी मैं जिसके   सरस्वती 

      बारहसिंगा।               बारह है सिंग जिसके      विशेष पशु 

इस समास का पहला तथा दूसरा पद अप्रधान है तथा समस्त पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर प्रकट कर रहा है  

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